
He usually spoke in HINDI - this is a rare Speech just discovered & put up by the Washington Post News Paper --
http://www.washingtonpost.com/wp-dyn/content/video/2008/06/27/VI2008062703016.html
मेरी, आपकी, अन्य की बात
लावण्यम----अंतर्मनशीर्षक में विषय-वस्तु के बीज समाहित होते हैं.लावण्यम----अंतर्मन इसी बीज का पल्ल्वीकरण है.हृदयेन सत्यम (यजुर्वेद १८-८५) परमात्मा ने ह्रदय से सत्य को जन्म दिया है. यह वही अंतर्मन और वही हृदय हैजो सतहों को पलटता हुआ सत्य की तह तक ले जाता है.लावण्य मयी शैली में विषय-वस्तु का दर्पण
बन जाना और तथ्य को पाठक की हथेली पर देना, यह उनकी लेखन प्रवणता है. सामाजिक, भौगोलिक, सामयिक समस्याओं
के प्रति संवेदन शीलता और समीकरण के प्रति सजग और चिंतित भी है. हर विषय पर गहरी पकड़ है. सचित्र तथ्यों को प्रमाणित करना उनकी शोध वृति का परिचायक है. यात्रा वृतांत तो ऐसे सजीव लिखे है कि हम वहीं की सैर करने लगते हैं.आध्यात्मिक पक्ष, संवेदनात्मक पक्ष के सामायिक समीकरण के समय अंतर्मन से इनके वैचारिक परमाणु अपने पिता पंडित नरेन्द्र शर्मा से जा मिलते हैं,
जो स्वयं काव्य जगत के हस्ताक्षर है.पत्थर के कोहिनूर ने केवल अहंता, द्वेष और विकार दिए हैं, लावण्या के अंतर्मन ने हमें सत्विचारों का नूर दिया है.पारसमणि के आगे कोहिनूर क्या करेगा?- डा. मृदुल कीर्तिAll sublime Art is tinged with unspeakable grief.
All Grief is a reflection of a soul in the mirror of life'SONGS are those ANGEL's sound that Unite US with the Divine.'
About me:
Music and Arts have a tremendous pull for the soul and expressions in poetry and prose reflects from what i percieve around me through them.
15 comments:
लावण्याजी,
इस रेकार्डिंग का लिंक देने के लिये बहुत धन्यवाद !
नीरज जी ,
आप सुनियेगा और बतायेँ कैसा लगा -
- लावण्या
लावण्या जी, ये तो अनमोल चीज़ सुना दी आप ने. बहुत बहुत आभार आप का.
Lavanyaji
Yes, it is Anmol.
Thanx.
कमाल कर दिया आप ने लावण्या जी...बहुत दूर की कौडी लायीं हैं आप...अभी तक कानो को विश्वास नहीं हो रहा...बहुत बहुत धन्यवाद
नीरज
अनमोल स्मृति!
ख़बर पढी थी पर सीमित रूचि जागी थी. मगर अब आप कह रही हैं तो अवश्य सुनना होगा.
आपका शुक्रिया किस तरह अदा करू.. बहुत अनमोल पोस्ट है ये
सुन लिया हो तब फिर आकर लिखियेगा -
कैसा लगा
- लावण्या
शुक्रिया इस अनमोल चीज के लिए बस ये चित्र हटा दे.....
क्यूँ ? आपको चित्र पसँद नहीँ आया अनुराग भाई ? ;-)
जान बूझकर रखा है :)
- सोचा कोई तो कुछ कहेगा -
और आपने कह दिया -
ये चित्र "बा" ने बापू के पैरोँ मेँ बहुत उपवास किये थे और हमेशा की तरह वे कई मील चलते थे
और बापू के परोँ मेँ दर्द था और बा उन्हेँ बच्चे की तरह प्यार से मालिश कर रहीँ थीँ उस वक्त का है -
बा ने बापू से बहुत प्यार किया
- जब कोई उनसे शिकायत करता कि ,
" आप को बापूने कितने दुख दीये ! "
तो वो कहतीँ ,
" शिकायत आप को होगी, मुझे मेरे पति पर पूरी निष्ठा और प्रेम है, मैँ कब आपसे शिकायत करने आयी थी ! आप मुझे मेरे पति के खिलाफ एक शब्द भी बोलकर ना उकसायेँ वही अच्छा होगा " ये सुमति माणेकलाल मुँशी से बा ने कहा था -
उनके बीच जो गहरा प्रेम था उसका एक स्वरुप है ये चित्र - इसे पहली बार देखा तब मैँ भावुक होकर बहुत रोई थी
बा और बापू,२० वीँ सदी के, वन मेँ काँटोँ पे चलनेवाले, राम और सीता ही हैँ..दुख मेँ भी सहज और एकदूसरे के लिये सम्पूर्णत: समर्पित -
- लावण्या
यह तो बहुत महत्वपूर्ण आडियो का लिंक दिया आपने और बापू को सुनने में रोमांच हो आया।
मैं जिस ग्रामीण इलाके में रहता हूं, ब्राडबैंड की सुविधा नहीं है। सर्वर इतना धीमा काम करता है कि इंटरनेट पर आडियो-वीडियो सुन या देख पाना संभव नहीं हो पाता। फिर भी आपलोगों का जो उत्साह है और मेरे भी मन में बापू की जो अमिट छवि है, उन सब से उनकी वाणी सुनने का रोमांच अनुभव कर सकता हूं।
बहुत से अन्य लोगों की तरह मेरी नजर में भी दुनिया में आधुनिक युग में बापू से बड़ा संत व राजनेता कोई नहीं।
thanks for this rare audio. I also have a small audio clip (in Hindi) of baapu on my pc.
ज्ञान भाई साहब,
अशोक भाई व
अभिषेक भाई
आप का आभार जो यहाँ आये और ओडीयो को सुना और
अशोक जी सुन नहीँ पाये उसका दुख है !
अभिषेक भाई,
आप भी लगायेँ जो आपके पास है - बापू की वाणी हिन्दी भी सुन पायेँ तो अच्छा लगेगा
स्नेह,
- लावण्या
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